Social Distancing and Economy

भारत में रीति रिवाज और सामाजिक नियम लोगो की भीड़ को इकटठा करते हैं | लोग शादियों और त्योहारों में इकटठा होते हैं | शहर की झोपड़ी और गाँव में औसत में पांच लोग एक झोपड़े में सोते हैं | यह रिवाज और तौर तरीकें सोशल डिस्टन्सिंग या फिर शारीरिक दूरी के लिए खतरा हैं | भीड़ वाले बाजार और कार्यस्थल भी आम बात हैं |पष्चिमी देशो में लोग खाने का सामान खरीद के फ्रिज में इकटठा कर लेते हैं, झोपड़ी में रहने वालीं जनता के लिए ऐसा कर पाना मुमकिन नहीं हैं |

भारत की 80 करोड़ कम आय वालीं जनता के लिए सरकार ने राहत देने वाले पैकेज का एलान किया | कुछ लोगो का कहना था कि यह राहत पैकेज काफी नहीं हैं | सरकार के पास आय के सीमित साधन हैं | इसकी मुख्य वजह यह हैं कि कुछ अमीर लोग टैक्स की चोरी करते हैं | इस वजह से सरकार की आय सरकार के खर्चो से कम रहती हैं | सरकार को अपने खर्चे पूरे करने के लिए नोट छापने की जरूरत पड़ती हैं | यह सच हैं कि सरकार के पास नोट छापने की मशीन हैं परन्तु अधिक नोट छापने से अर्थव्यवस्था को नुकसान होता हैं | ज्यादा नोट छापने से रुपये की कीमत कम हो जाती हैं | अधिक नोट छापने से महंगाई बड़ जाती हैं |रुपये की खरीदने की क्षमता कम हो जातीं हैं |डॉलर के मुक़ाबले रुपये कमजोर हो जाता हैं | कई देशो की अर्थव्यवस्था ज्यादा नोट छापने से बर्बाद हो चुकी हैं |

Vedant kabra.

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